नेपाल में राजशाही की गतिविधियां तेज
नेपाल में राजशाही की पुनर्स्थापना की मांग इन दिनों जोर पकड़ रही है। रविवार को राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा), जो राजशाही समर्थक मानी जाती है, ने नेपाल नरेश के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के पोस्टर लहराए। यह पोस्टर नेपाल और भारत के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गया है।
नेपाल नरेश ने गोरक्षनाथ मंदिर में चढ़ाई थी खिचड़ी
मकर संक्रांति के अवसर पर नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र ने परंपरा के तहत गोरक्षनाथ मंदिर, गोरखपुर में खिचड़ी चढ़ाकर मंगलकामना की थी। उनके नेपाल लौटने के बाद से राजशाही की बहाली को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राप्रपा ने रैलियां और प्रदर्शन बढ़ा दिए हैं, जिससे नेपाल में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
नेपाल-भारत के घनिष्ठ संबंध
नेपाल और भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, के बीच सीमा से जुड़े होने के कारण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हैं। गोरक्षनाथ मंदिर और नेपाल राजशाही का रिश्ता सदियों पुराना है। 2008 में नेपाल में राजशाही समाप्त हो गई थी और लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई थी। इस साल 2025 में मकर संक्रांति के दौरान नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र ने गुरू गोरक्षनाथ मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की। वे सड़क मार्ग से गोरखपुर गए थे और उनकी नेपाल वापसी पर सीमा क्षेत्र में भव्य स्वागत किया गया था। रविवार को जब राजा पोखरा से लौट रहे थे, तब राप्रपा समर्थकों ने उनके साथ योगी आदित्यनाथ का पोस्टर भी लहराया। यह तस्वीरें 24 घंटे के भीतर ही नेपाल और उत्तर प्रदेश में वायरल हो गईं।
हिंदुत्व की मजबूत छवि हैं योगी आदित्यनाथ
गोरक्षनाथ मंदिर से जुड़े योगी आदित्यनाथ की छवि एक मजबूत हिंदू नेता के रूप में है, जो मुख्यमंत्री बनने के बाद और अधिक प्रभावशाली हुई है। वहीं, नेपाल का शाही परिवार भी हिंदुत्व से जुड़ा माना जाता है। नेपाल के कई हिंदू घरों में आज भी पूर्व नरेश स्व. वीरेंद्र विक्रम और मौजूदा राजा ज्ञानेंद्र की तस्वीरें देखी जाती हैं।गोरक्षनाथ मंदिर की लोकप्रियता नेपाल में भी काफी अधिक है।
रिपोर्ट : नीलू दुबे,महाराजगंज
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