महराजगंज,नीलू दुबे : नेपाल के वीरगंज स्थित जनकपुर धाम महेंद्र नारायण निधि संस्थान में रविवार शाम भारत के प्रसिद्ध छऊ नृत्य का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। इस सांस्कृतिक आयोजन में भारतीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास का संयुक्त आयोजन
यह आयोजन नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसके लिए नई दिल्ली स्थित इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन (ICCR) के कुशेश्वर ठाकुर के नेतृत्व में एक विशेष दल नेपाल पहुंच चुका है। जनकपुर स्थित सांस्कृतिक केंद्र में इस कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं।
शनिवार देर शाम नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सांस्कृतिक केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल की पारस्परिक संस्कृति और सभ्यता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।
छऊ नृत्य: विरासत में शामिल एक अनूठी कला
छऊ नृत्य भारत के ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड का प्रसिद्ध लोकनृत्य है। इसकी उत्पत्ति ओडिशा के मयूरभंज जनपद से मानी जाती है। पश्चिम बंगाल में इसे पुरुलिया छऊ और झारखंड में सरायकेला छऊ के रूप में जाना जाता है। इस नृत्य की विशेषता इसे अन्य लोकनृत्यों से अलग बनाती है। यही कारण है कि छऊ नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है।
बसंत नवरात्रि में छऊ नृत्य का विशेष महत्व
छऊ नृत्य का महत्व बसंत ऋतु के चैत्र नवरात्र में अधिक बढ़ जाता है। पुराणों के अनुसार, यह नृत्य भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा हुआ माना जाता है। नेपाल में महादेव और देवी की गहरी श्रद्धा होने के कारण इस नृत्य को वहां विशेष श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है।
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