Fake Appointment
उत्तर-प्रदेश

ठप सी पड़ गई संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्ति मामले की जांच

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्तियों की जांच अब बंद हो गयी है. मामले में पुलिस भी दिलचस्पी नही ले रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मामले में चुप्पी साध ली है. मामले में जालसाजों ने फर्जी नियुक्ति पत्र देकर युवाओं से लाखों रुपए ऐंठ लिये हैं. नियुक्ति पत्र भी  विश्वविद्यालय के एक कक्ष से ही वितरित हुआ था.

विश्वविद्यालय में नियुक्ति दिलाने के नाम पर जालसाजों ने कई जिलों के युवाओं से मोटी रकम वसूली. युवाओं ने तीन लाख से छह लाख रुपए तक का भुगतान कर दिया. कुछ को तो फर्जी ढंग से विश्वविद्यालय में काम भी कराया गया. युवाओं को यह दिखाने की कोशिश कि उनकी नियुक्ति सही है.

जब युवाओं को इस बात का अंदाजा हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उन्होंने 17 जुलाई को और कुलसचिव को एक पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी दी. पहले तो विश्वविद्यालय ने इसे हल्के में लिया. मामला उछलने पर विश्वविद्यालय की छवि धूमिल होने की आशंका में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस को तहरीर दे दी.

शासन और सीएम ऑफिस से भी इस बारे में जानकारी मांगी गई. वहां भी रिपोर्ट विद्यालय प्रशासन ने भेज दी. शासन से मांग की गई कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि विश्वविद्यालय की छवि धूमिल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो सके.

सबके अपने-अपने बहाने !

इसी मामले में चेतगंज पुलिस ने भी आगरा के एक युवक शिकायत पर मामला दर्ज किया था. इसके बाद से जांच की प्रक्रिया सुस्त पद गयी. पुलिस का कहना है कि शिकायत करने वाले सामने नहीं आ रहे हैं, उनको कई बार बुलाया गया.

विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आशुतोष मिश्र का कहना है कि उन्होंने अपनी ओर से सभी कारवाई कर दी. जांच करना पुलिस का काम है. कुल मिलाकर जांच सिर्फ लिखा पढ़ी तक सीमित गई है. युवाओं से लाखों रुपए ठगने वाले जालसाजों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. अधिकतर पीड़ित युवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दूसरे जिलों के हैं, इसलिए वह यहां आकर दबाव भी नहीं बना पा रहे हैं.

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