नज़रबंद रहे उदय प्रताप, शांति से निकला ताजिया

  • हनुमान मंदिर पर चौथे साल भी नही हो सका भंडारा, पूजा पाठ पर भी रहा खाकी का पहरा
  • भारी फोर्स के साथ एडिशनल एसपी सहित सीओ ने किया मार्च
  • हिंदू समाज को कुचलने का कम कर रही सरकार : उदय प्रताप

प्रतापगढ़ – आखिरकार चौथे साल भी भंडारे पर रोक रही और भंडारा नही हो सका. ताजिया निकलने के बाद प्रशासन ने राहत की साँस ली. किले से लेकर हनुमान मंदिर के आस पास भारी पुलिस बल तैनात थी. दरअसल कुंडा कोतवाली के शेखपुर आशिक स्थित हनुमान मंदिर पर हर साल मोहर्रम के जुलूस निकलने के दिन राजा भैया के पिता उदय प्रताप भंडारा करना चाहते हैं इसके पीछे का तर्क यह है इसी दिन एक बन्दर की यहाँ मौत हो गयी थी. प्रशासन ने भंडारे पर चार साल से रोक लगा रखी है. प्रशासन का तर्क है जुलूस के दौरान भंडारा होने से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है.

इस बार भी पुजारी उमाकांत ने जिलाधिकारी से अनुमति मांगी थी. इसमें देरी करने पर पुजारी उमाकांत हाईकोर्ट से डायरेक्शन लिया. इसके बाद भी जिलाधिकारी ने भंडारे की अनुमति नहीं दी. सोमवार को मंदिर के दूसरी तरफ लगे झंडों को लेकर विवाद हो गया. इसे हटाने के लिए नोटिस दिया गया लेकिन झंडा नहीं हटाने पर मामला गरम हो गया. बाद में उन झंडों पर बैरेकेडिंग कर दी गयी. प्रशासन ने भंडारा रोकने के लिए भदरी गेट के सामने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया. इसके साथ ही शेखपुर स्थित हनुमान मंदिर पर भी भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई. करीब तीन बजे ताजिया उठाया गया और करबला ले जाया गया. इस दौरान पुलिस अधीक्षक भी मौके का जायजा लेने पहुंचे. उधर भंडारे के आयोजन को लेकर प्रशासन द्वारा नज़रबंद रहे उदय प्रताप @ बड़े महाराज मीडिया से रूबरू हुए. उनका कहना था हिंदू समाज को कुचलने का काम किया जा रहा है. यह मौलिक अधिकारों का हनन है. दोनों धर्मों को समान भाव से देखा जाना चाहिए लेकिन इस तरह के प्रतिबंध लगाकर शासन क्या साबित करना चाहता है.

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